चैप्टर 5 — अपहरणकैफ़े के बाहर शाम उतरने लगी थी।कांच की दीवारों पर हल्की नारंगी रोशनी पड़ रही थी और अंदर का सुकून भरा माहौल अब भी वैसा ही था — जैसे दुनिया में कुछ गलत हो ही नहीं सकता।सावी पानी का ग्लास हाथ में पकड़े चुप बैठी थी।अथर्व बिल पे करने काउंटर की तरफ गया हुआ था।उसके दिमाग में अभी भी वही पल घूम रहा था —घुटनों पर बैठा अथर्व… कांपती आवाज… सच्ची आँखें।दिल भारी था।वो उठी और बाहर के दरवाज़े के पास चली गई। उसे थोड़ी हवा चाहिए थी।दरवाज़ा खोलते ही हल्की ठंडी हवा चेहरे से टकराई। सड़क