चैप्टर 3 — शिकायतक्लासरूम में सन्नाटा ठहरा हुआ था।रेयांश दरवाज़े पर खड़ा था। उसकी निगाहें सीधी सावी पर टिकी थीं।“तुम्हें अभी मेरे साथ चलना होगा।”सावी का दिल जोर से धड़क रहा था, लेकिन इस बार उसके चेहरे पर डर नहीं… सख़्ती थी।वो धीरे से खड़ी हुई।“मैं अनजान लोगों के साथ क्यों जाऊँ?” उसकी आवाज़ साफ और ठंडी थी।“तुम कौन हो?”पूरी क्लास सांस रोके देख रही थी।रेयांश कुछ पल उसे देखता रहा। जैसे वो बहुत कुछ कहना चाहता हो… मगर कह नहीं सकता।अथर्व आगे बढ़ा।“सुनाई नहीं दिया? वो नहीं जाएगी।”रेयांश की नजर अब अथर्व पर गई।दोनों के बीच हवा भारी हो