माफिया की मोहब्बत - 2

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चैप्टर 2 — बेचैनीबारिश रात तक चलती रही।सावी के कमरे की खिड़की आधी खुली थी। पर्दे हवा के साथ हिल रहे थे और मेज़ पर रखा वही सफेद गुलाब अब हल्का झुक चुका था। पंखुड़ियों पर जमी बूंदें चमक रही थीं… लेकिन सावी की आंखों में नींद नहीं थी।उसके दिमाग में बार-बार वही दृश्य घूम रहा था —तेज बाइक… चीख… और रेयांश का चेहरा।वो डरावना नहीं लगा था।अजीब तरह से… सुरक्षित लगा था।सावी ने खुद को झटका —“पागल हो क्या… किसी अनजान लड़के को जानती भी नहीं।”लेकिन सवाल पीछा नहीं छोड़ रहे थे।उसे बचाने कौन आया?हमलावर कौन थे?और उसे देखकर