औद्योगिक कचरा और विकास विवेक रंजन श्रीवास्तव आज आधुनिक विकास के केंद्र में मशीनीकरण और औद्योगिक उत्पादकता है। इंटरनेट, मोबाइल और अनगिनत मशीनों ने जीवन को सुविधा संपन्न बनाया है, पर इसी के साथ हिंसा, शोषण, विषमता, बेरोजगारी, स्वास्थ्य संकट और पर्यावरण विनाश भी तेज गति से बढ़े हैं। तेज रफ्तार जीवन में समय का अभाव, रिश्तों में कृत्रिमता, अकेलेपन की भावना और शारीरिक श्रम की कमी ने न केवल समाज को भीतर से कमजोर किया है, बल्कि प्रकृति के साथ हमारे संबंधों को भी असंतुलित कर दिया है। गांधीजी की चेतावनी कि हम कहीं शरीर रूपी अपनी मूल मशीन का उपयोग