जानवी ने अपना चेहरा अपने हाथों में छुपा लिया।कार मे वो अकेली थी लेकिन उसके अंदर अकेलापन समंदर जैसा फैल चुका था।उसकी सिसकियाँ धीमी होने लगीं…लेकिन अंदर का तूफ़ान और तेज़ हो चुका था।कुछ देर बाद—वह उठी, कार के आईने मे अपना चेहरा दैखने लगी , उसकी आँखें लाल थीं, चेहरा सूजा हुआ, और मन… पूरी तरह बिखरा हुआ।जानवी :- “अगर उसे मेरी परवाह होती…तो वो ऐसा कभी न होने देता…”उसने खुद से कहा।और एक आँसू फिर लुढ़क गया। ये सब रमेश दैखकर चोंक गया था और कहता है --रमेश :- ये मोनिका ने जानवी को ऐसा क्या बोल दिया