चुड़ैल का श्राप एक छोटे से पहाड़ी गाँव में, जहाँ घने जंगल चारों ओर फैले हुए थे, चुड़ैल का नाम सुनते ही लोग काँप जाते थे। गाँव के बाहर पुराना मंदिर था, जिसे 'चुड़ैल मंदिर' कहा जाता था। वहाँ रात में काली परछाईं भटकती, लंबे बाल उड़ते, और डरावनी हँसी गूँजती।राहुल, दिल्ली से आया नौजवान इंजीनियर, गाँव में अपनी नानी के पास छुट्टियाँ मनाने आया था। नानी ने चेतावनी दी, "बेटा, जंगल में मत जाना। वहाँ चुड़ैल रहती है—काली रानी। सौ साल पहले गाँव वालों ने उसे जिंदा जला दिया था। अब वह बदला लेती है।" राहुल हँसा, "नानी, ये सब