क्या रुद्र उस 'सत्य' को झेल पाएगा जिसे महागुरु 'कैद' कह रहे थे? और क्या वह शिखर-मुकाबले की पहली ही चुनौती में जीवित बच पाएगा, जहाँ हार का अर्थ केवल प्रतियोगिता से बाहर होना नहीं, बल्कि अस्तित्व का मिट जाना था?मैदान में बिखरी वह लकड़ी की तलवार और सिसकियाँ भरता रुद्र—यह दृश्य किसी का भी हृदय पिघलाने के लिए पर्याप्त था। रुद्र का विलाप केवल थकान की वजह से नहीं था, बल्कि उस भारी बोझ की वजह से था जो उसके किशोर कंधों पर बिना पूछे डाल दिया गया था।एक पिता का स्पर्शतभी, रुद्र को अपने कंधे पर एक भारी