शाम को आर्यन मीटिंग कैंसल की। अनन्या के कमरे में बैठा। "खाना खा लो।" अनन्या चुप। आर्यन ने सूप बनाया – खुद। "याद है गंगा घाट? वो पल सच्चे थे।" अनन्या की आँखें नम। "सब झूठ। फैमिली बर्बाद।" आर्यन ने हाथ थामा, "नई शुरुआत करेंगे। मैं तेरे साथ।" अनन्या छूटी, लेकिन स्पर्श में गर्मी। रोमांस की चिंगारी बाकी। तभी गार्ड का फोन – "बॉस, विक्रम का ट्रक बंगले की ओर। हमला!" आर्यन गन उठाया। अनन्या उठी, "मैं भी!" दोनों बाहर। रात का अंधेरा, ट्रक लाइट्स। गोलीबारी शुरू। विक्रम नीचे उतरा, "राठौर, अंकित मेरा था। बदला लेगा!" आर्यन ने जवाब दिया।