अंत से अनंत तक की यात्रा - शिव

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अंत से अनंत तक की यात्रा — शिव अंत क्या है? जहाँ सीमाएँ समाप्त होती हैं, जहाँ नाम और रूप विलीन हो जाते हैं, जहाँ अहंकार टूटता है — वही अंत है।और अनंत क्या है?जहाँ से सब प्रारंभ होता है, जहाँ सब कुछ व्याप्त है, जो काल, दिशा, स्थिति से परे है — वही अनंत है।अंत और अनंत के बीच जो सेतु है, वही शिव हैं।वह शून्य भी हैं और पूर्ण भी।वह मौन भी हैं और नाद भी।वह ध्यान भी हैं और समाधि भी।शिव सत्य हैं — क्योंकि सत्य वही है जो कभी बदलता नहीं।शिव शाश्वत हैं — क्योंकि समय