संसार एक रंगमंच: कला, मनुष्यता और मेरा जीवन पथ

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है—यह केवल एक कथन नहीं, बल्कि जीवन का शाश्वत सत्य है। समाज में रहते हुए ही मनुष्य अपने अस्तित्व को अर्थ देता है, संबंधों को आकार देता है और भावनाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करता है। इस अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है—कला। साहित्य, संगीत और नाट्य—ये केवल रचनात्मक विधाएँ नहीं, बल्कि मनुष्यता के संरक्षण और संवर्धन के साधन हैं।कला हमें भीतर से परिष्कृत करती है। वह हमें संवेदनशील बनाती है, जोड़ती है, और हमारी सामूहिक चेतना को जीवित रखती है। जब हम कविता पढ़ते हैं, संगीत सुनते हैं या रंगमंच पर किसी पात्र को जीवंत होते