अध्याय 7 – अब मैं चुप नहीं हूँ(दादा-दादी की लाडली का सफर)मैं वही लाडली हूँ,जिसे दादा-दादी ने हमेशा अपने प्यार में पाला,जिसके लिए हर मुस्कान, हर आशीर्वाददिल से निकला था।आज भी, जब मैं अपने बीते दिनों को याद करती हूँ,मुझे उनकी वो बातें याद आती हैं —“बेटी, दुनिया चाहे जैसी भी हो,तुम अपनी इज्ज़त और खुशी कभी मत खोना।”और यही सीख, यही प्यार,मेरे हर फैसले में,मेरी हर लड़ाई में,मेरी ताकत बनकर साथ है।दो शादियों के बादमैं यह समझ चुकी थीकि हर बार समझौता करनासमाधान नहीं होता…अध्याय 7 – अब मैं चुप नहीं हूँदो शादियों के बादमैं यह समझ चुकी थीकि