रूहों का सौदा - 9

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​अध्याय 9: अतीत की परछाइयाँ – एक रहस्यमयी आगमन​वर्तमान का कोलाहल और चिंताएँ जैसे थम सी गईं और समय का चक्र पीछे की ओर घूमने लगा। पंद्रह वर्ष पहले की एक ऐसी ही धुंधली और बरसाती रात थी। 'विशाल गुरुकुल' के ऊँचे द्वार बंद थे और बाहर बादलों की गर्जना पहाड़ियों को कँपा रही थी।​वह अज्ञात पथिक​आधी रात का समय था जब मुख्य द्वार पर तैनात प्रहरी ने देखा कि घने कोहरे को चीरती हुई एक आकृति द्वार की ओर बढ़ रही है। वह व्यक्ति पूरी तरह से काले लबादे में लिपटा हुआ था, जिससे उसका चेहरा देख पाना असंभव