1: मुलाकात और शुरुआत (प्रेम नगर की वो धूल भरी शाम)लखनऊ की गर्मियों में हवा भी पसीना बहाती है। प्रेम नगर का वो पुराना पुस्तकालय — लकड़ी की सीढ़ियाँ चरमराती थीं, पंखे की आवाज़ में धूल उड़ती थी, और किताबों की महक पुरानी यादों जैसी लगती थी। मैं वहाँ रोज़ आता था। नहीं इसलिए कि पढ़ाई करनी थी, बल्कि इसलिए कि घर में माँ-बाप की लड़ाई से बचना था।मेरा नाम आरव शर्मा। 26 साल। सॉफ्टवेयर कंपनी में जूनियर डेवलपर। सैलरी 38 हज़ार। किराए का एक कमरा हजरतगंज के पास। माँ गाँव में रहती हैं, पापा शहर में मजदूरी करते थे