फाइनल टेस्ट पास करने के बाद तारा की भूमिका सहयोग फाउंडेशन में बदल चुकी थी. अब वह सिर्फ मीरा देसाई के आदेश नहीं मान रही थी, बल्कि रुद्राक्ष शेखावत की नजर में भी आ चुकी थी. यह वही मोड था, जहाँ से या तो Mission तेजी से आगे बढता है या अचानक खत्म हो जाता है.अगले कुछ दिनों में तारा को ट्रस्ट के अंदरूनी कामों में खुलकर शामिल किया जाने लगा. उसे अब सिर्फ फाइलें सॉर्ट करने या कॉल्स लेने तक सीमित नहीं रखा गया. उसे मीटिंग्स में बैठने दिया जाने लगा, लेकिन बोलने की अनुमति अब भी नहीं थी.