सदियों से तुम मेरी - 4

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अगली सुबह दिव्या देर तक सो नहीं पाई। रात की घटना बार-बार उसकी आँखों के सामने घूम रही थी। वह छाया, वह डर… और फिर अर्जुन का अचानक सामने आ जाना। उसे समझ नहीं आ रहा था कि सबसे ज्यादा असर उस डर का था या उस सुरक्षा का, जो अर्जुन के पास होते ही उसे महसूस हुई थी।कॉलेज पहुँचते ही उसने अर्जुन को ढूँढना चाहा, लेकिन खुद पर ही झुँझला गई। वह क्यों किसी नए स्टूडेंट को इतनी अहमियत दे रही थी? उसने खुद को सामान्य रखने की कोशिश की और क्लास में जाकर बैठ गई।कुछ ही देर में