मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 20

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हवेली की आख़िरी रातबरसात की वह रात जैसे किसी अधूरी कहानी की तरह आसमान पर टंगी हुई थी। बादलों की गरज से धरती काँप रही थी और बिजली की चमक अँधेरे को चीरकर किसी रहस्य का इशारा कर रही थी। शहर से दूर, घने जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली खड़ी थी—वक़्त की मार से टूटी हुई, मगर अब भी अपने भीतर अनगिनत राज़ समेटे।लोग उसे “विरान हवेली” कहते थे। कहते हैं, वहाँ जो भी गया… वापस नहीं लौटा।आरव, जो पेशे से लेखक था, ऐसी कहानियों को अंधविश्वास मानता था। उसे रहस्यों से प्यार था, और वह चाहता था कि