मैं दादा-दादी की लाड़ली - 6

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मैं दादा-दादी की लाडली – 6दूसरी शादी — वही टूटा भरोसायह “मैं दादा-दादी की लाडली” की कहानी का छठा अध्याय है।बचपन की मासूमियत और टूटे सपनों के बाद,अब मेरी ज़िंदगी एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई थीजहाँ मुझे अपने लिए नहीं,बल्कि अपने बेटे के भविष्य के लिए फैसला लेना था।पहली शादी ने मुझे भीतर तक तोड़ दिया था।भरोसा जैसे कहीं पीछे छूट गया था।मैंने सोचा था कि अब मेरी ज़िंदगीसिर्फ मेरे बेटे और मेरी जिम्मेदारियों तक सीमित रहेगी।लेकिन समाज को एक अकेली औरतकभी पूरी नहीं लगती।लोगों की नज़रें,रिश्तेदारों की बातें,और घरवालों की चिंता —सब मिलकर एक ही बात दोहराने