प्रेमचंद के साहित्य में निहित व्यंग्यविवेक रंजन श्रीवास्तव ए 233 ओल्ड मिनाल रेजीडेंसी जे के रोड भोपाल 462023कथा सम्राट का व्यंग्यबोधमुंशी प्रेमचंद (१८८०-१९३६) हिंदी साहित्य के इतिहास में एक युगप्रवर्तक रचनाकार के रूप में स्थापित हुए हैं। उनके साहित्यिक व्यक्तित्व की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता आदर्शोन्मुख यथार्थवाद रहा, जिसके अंतर्गत उन्होंने भारतीय समाज के यथार्थ चित्रण के साथ-साथ उसमें सकारात्मक परिवर्तन की रचनाएं की हैं , जो क्रिएटिव हिंदी कथा साहित्य की धरोहर है। उनकी रचनाओं में व्यंग्य की एक अंतर्निहित सशक्त धारा विद्यमान है, जो सामाजिक कुरीतियों, राजनीतिक विसंगतियों, धार्मिक पाखंड और मानवीय दुर्बलताओं पर करारी चोट करती दिखती है।प्रेमचंद का