चेकपोस्ट:चाणक्य - 4

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एक. आशीष भाई का' ऑफिस- एग्जिट' और आजादी का सपनाआशीष जैन के लिए उनकी सफेद एक्टिवा कोई साधारण मशीन नहीं, बल्कि एक' टाइम मशीन' है. जैसे ही वह ऑफिस की कांच वाली बिल्डिंग से बाहर कदम रखते हैं, उनके दिमाग में एक ही धुन बजती है—" आजादी! वह अपनी उंगलियों से एक्टिवा की चाबी को वैसे ही नचाते हैं जैसे कोई जासूस अपनी गन लोड कर रहा हो. उनके लिए ऑफिस की वह आठ घंटे की कैद, फाइलों का वह पहाड और बॉस की वह' डेडलाइन' वाली धमकियां, सब कुछ पीछे छूटने ही वाली होती हैं.वह हेलमेट पहनते समय शीशे