ज़ख्मों की शादी - 3

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Kabir का घर – आलीशान लेकिन शांत, सुरक्षा के लिहाज़ से पूरी तरह व्यवस्थित। Kabir ने गाड़ी घर के गेट पर रोक दी। वो घर में घुसा और सीधे उसे अपने bedroom में ले गया। उसने धीरे से Shristi को अपनी गोद से नीचे उतारा। घर के अंदर का माहौल शांत था।Shristi (कड़वी हँसी के साथ, कांपती आवाज़ में ) बोली - आप… मुझे फिर से घर ले ही आए। मन नहीं भरा ना आपका… मुझे दर्द देके। अभी भी कोई कसर बाकी रह गई क्या?Shristi की आँखों में डर और आक्रोश दोनों झलक रहे थे। उसके होंठों पर हल्की मुस्कान,