भाग 1: पुरानी यादों का बोझविक्रम एक सफल आर्किटेक्ट था, जिसे पुरानी इमारतों और ऐतिहासिक ढांचों से गहरा लगाव था। जब उसे पता चला कि उसके दादाजी ने पुश्तैनी गाँव 'रुद्रपुर' में उसके लिए एक पुरानी हवेली छोड़ी है, तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। वह शहर की भीड़भाड़ से थक चुका था और कुछ समय शांति में बिताना चाहता था।रुद्रपुर एक ऐसा गाँव था जहाँ सूरज ढलते ही सन्नाटा पसर जाता था। जब विक्रम अपनी कार से वहाँ पहुँचा, तो गाँव वालों की नज़रें उस पर टिकी थीं—उन नज़रों में स्वागत कम और चेतावनी ज़्यादा थी। हवेली गाँव