रवीन्द्र नाथ त्यागी : व्यंग्य स्तंभ

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रवीन्द्रनाथ त्यागी हिंदी व्यंग्य परंपरा के आधार प्रतिनिधि विवेक रंजन श्रीवास्तव रवीन्द्रनाथ त्यागी हिंदी व्यंग्य साहित्य की उस गौरवशाली परंपरा के प्रतिनिधि लेखक हैं, जिन्होंने व्यंग्य को केवल हास्य या चुटकुलेबाजी का माध्यम नहीं रहने दिया, बल्कि उसे सामाजिक आलोचना, आत्मपरीक्षण और सांस्कृतिक विमर्श का गम्भीर औजार बनाया। उनका व्यंग्य हँसाता कम है, चौंकाता ज्यादा है । वह पाठक को भीतर तक झकझोरता है और अपने ही समाज की विडंबनाओं के आईने में उसका चेहरा दिखाता है। त्यागी जी का व्यंग्य लेखन , विशुद्ध मनोरंजन के विरुद्ध एक विद्रोह है। वह मनोरंजन के बहाने व्यक्ति की सामाजिक और मानसिक जड़ताओं से, रूढ़ियों