शीर्षक: वल्चर: पंखों के पीछे का सच[दृश्य 1 – अंधेरे से जन्म]कभी एक साधारण ग्रह था—कायरॉन। वहाँ आसमान हमेशा धूसर रहता था और ज़मीन पर लोग खामोशी में जीते थे। उसी ग्रह की खदानों में एक नौजवान मज़दूर काम करता था—अर्जुन। थके हाथ, धूल से भरा चेहरा, पर आँखों में उड़ने का सपना।पर्यवेक्षक (डाँटते हुए):“सपने मत देखो, अर्जुन। यहाँ लोग उड़ते नहीं… दबते हैं।”अर्जुन (धीमे स्वर में):“दबते-दबते अगर दिल मर जाए… तो आदमी जिए कैसे?”रात को वह खदान की छत पर बैठकर टूटे पंखों की पुरानी तस्वीरें बनाता।[दृश्य 2 – पहला पंख]एक रात आसमान से धधकता हुआ एक यंत्र गिरा।