प्रेम न हाट बिकाय - भाग 10

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 10 --             विद्यापीठ पास होने के कारण आकाशवाणी के निदेशक का विद्यापीठ के  हिन्दी-विभाग में आना-जाना होने लगा और गुजरात-वैभव के द्फ़्तर में भी ! जहाँ हिन्दी-भाषी साहित्यकारों का खूब स्वागत-सत्कार किया जाता | वे  ऐसे लोगों को जोड़ने लगे जिनकी  साहित्य में रुचि थी |हर सप्ताह उनका अनुरोध रहता कि संस्था का कोई न कोई सदस्य अपने घर पर गोष्ठी रखे लेकिन सबके लिए यह संभव  न हो पाता, वो नाराज़ हो उठते ; "अनामिका जी ! आपको मैं स्वयं फ़ोन करता  हूँ फिर भी आप नहीं आतीं तो आपको फ़ोन करना बंद  कर