प्रेम न हाट बिकाय - भाग 9

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9--        विद्यापीठ में  एक लगभग पच्चीस वर्ष का गुजराती लड़का था जो किसी गाँव से पढ़ने आया था | पास के गाँव के स्कूल में अध्यापक था वह !छोटे बच्चों को पढ़ाने  के लिए काफ़ी थी उसकी शिक्षा जितनी भी थी |आख़िर फिर से विद्यार्थी बनने की कहाँ ज़रूरत थी ?कभी उसे लगता उसके मन में यह विचार  तो उठना ही नहीं चाहिए |वह अपनी उम्र तो देखे ! क्या कर रही है ? वह तो इस उम्र में बच्चों व गृहस्थी के साथ पढ़ रही है -----उसे खुद की सोच पर अफ़सोस हुआ लेकिन जब परेशानी