प्रेम न हाट बिकाय - भाग 8

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8-         पहले दिन एम.ए की कक्षा में युवाओं के बीच बैठना उसे कुछ अजीब सा लगा | सारे छात्र बीस/बाईस/चौबीस साल के आसपास और वह चौंतीस वर्ष की अम्मा जी ! कुछ ही दिनों बाद वह अपने मिलनसार ख़ुशनुमा स्वभाव के कारण सबकी दीदी बन गई और संकोच की दीवार उसके सामने से न जाने कहाँ ग़ायब हो गई |इसमें उसका मूल खिलंदड़ा स्वभाव काम आया | अब वह अपने से छोटी उम्र के दोस्तों के साथ खिलखिलाने लगी थी किन्तु  उनके साथ अभी तक विश्विद्यालय तक ही संबंध सीमित थे | शेष समय तो गृहस्थी,