5 -- अब जब बच्चे अपनी-अपनी दिनचर्या में व्यस्त रहने लगे तब गृहस्थी में व्यस्त आना की पलकों ने झपकी ली | बच्चों के स्कूल जाने के बाद उसे अपना खाली रहना अखरने लगा |कोई खोया हुआ सा सपना उसकी आँखों में फिर से भर आया | कपड़ों की अलमारी व्यवस्थित करती तो लगता यहाँ तो पुस्तकें रखनी थीं फिर कपड़े क्यों ? बच्चों की पुस्तकें खोलकर बैठती तो लगता, कुछ भी नहीं आता उसे, फिर से बच्चों के साथ पढ़ना शुरू कर देना चाहिए | सब ओर पुस्तकें ही पुस्तकें दिखाई देतीं | बच्चों के स्कूल