प्रेम न हाट बिकाय - भाग 3

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3--         गुज़रे पल किसकी मुट्ठी में कैद रह सकते हैं ?जब समय अवसर देता है तब मन का ढीठपन उस अवसर को भुनाने में आनाकानी करता है, समय बीत जाने पर हम हाथ मलते रह जाते हैं | खूबसूरत अहसासों की संवेदना से घिरा मन (अनामिका )आना  को अपने बालपन में खींचकर ले जाता, आँसू से लबरेज़ कर देता उसे ! कहाँ, कैसे बालपन व किशोरावस्था के दिनों को समेट ले ! उन दिनों तो मन के भीतर से एक आक्रोशित भावना पनपती रहती और खीज आती माँ-पापा पर !'क्यों हर समय अपने उपदेश थोपते रहते