अध्याय 6: माधव का खुलासा और बढ़ता संशय"मुख्य द्वार पर गिरा वह काला लबादा केवल कपड़ा नहीं था, वह रुद्र के अस्तित्व का अंत था या किसी भयानक काल की शुरुआत? महागुरु के कांपते हाथ और उस पर रक्त से अंकित 'रुद्र' का नाम—सभा-प्रांगण के सन्नाटे को चीरने के लिए काफी था।"मुख्य द्वार पर मिला वह रहस्यमयी काला लबादा और रक्त से लिखा रुद्र का नाम—इस दृश्य ने सभा-प्रांगण में मौजूद हर व्यक्ति की रूह कँपा दी थी। महागुरु उस लबादे को थामे पत्थर की मूरत बने खड़े थे। लेकिन आचार्य विक्रम जानते थे कि समय हाथ से निकला जा