रात के ठीक 2:13 बजे थे। शहर के पुराने सरकारी अस्पताल का पिछला हिस्सा — जहाँ शायद ही कोई जाता हो — अँधेरे में डूबा हुआ था। वहीं था… मॉर्ग। दीवारों पर जमी सीलन, टिमटिमाती हुई पीली लाइट, और हवा में एक अजीब-सी ठंडक। जैसे किसी ने कमरे से सारी गर्मी चुरा ली हो। रवि, नया वार्ड बॉय, अपनी पहली नाइट ड्यूटी पर था। उसे चेतावनी दी गई थी — “रात में अगर मॉर्ग से आवाज़ आए… तो मत जाना।” वह हँस दिया था। लेकिन अब… वो हँसी गले में अटक चुकी थी। पहली आवाज़ठक… ठक… ठक… मॉर्ग के अंदर