सूर्योदय की लालिमा, भर दे मन में आस।तम का हर ले मौन में, जीवन का विश्वास॥यदि आप चाहें तो मैं सूर्योदय का स्पर्श जब, छू ले सूना मन।थकन उतर कर दूर हो, खिल उठे हर क्षण॥सूर्योदय संग जागता, सोया हुआ विश्वास।हर दिन देता सीख यह, मत छोड़ो प्रयास॥उन्मुक्त गगन की लाली फैली है चहुँओरक्षितिज में सूरज विराजमान हुआ प्राची की ओरसूर्योदय की लालिमा, कहती मौन पुकार।उठो, समय का मान रखो, मत खोओ अधिकार॥सूर्योदय जब मुस्कुरा, नभ के खुले कपाट।नव आशा के पंख लगें, बदले जीवन-घाट॥सूर्योदय की पहली रौशनी, धोए मन का मेल।बीते कल की छाया हटे, आगे बढ़े खेल॥सूर्योदय का