राधिका के हाथों में वो पुरानी चाबी तब से जल रही थी जब से उसकी दादी ने आखिरी सांस के साथ उसे थमाई थी, और अब तीन दिन बाद, उस चाबी की धातु इतनी गर्म हो चुकी थी कि उसकी हथेली पर निशान बनने लगे थे, फिर भी वो उसे छोड़ नहीं सकती थी क्योंकि हर बार जब वो कोशिश करती, उसे दादी की आखिरी फुसफुसाहट सुनाई देती - "जब तक पहाड़ की चोटी पर मौजूद उस दरवाज़े को नहीं खोलोगी, तब तक न तुम्हारी किस्मत बदलेगी, न इस गाँव की।" गाँव के लोग कहते थे कि पहाड़ की चोटी