इश्क का पैगाम

---इश्क़ का पैग़ामलेखक: विजय शर्मा एरी  प्रस्तावनाइश्क़—यह शब्द जितना छोटा है, उतना ही गहरा। यह केवल दो दिलों का मेल नहीं, बल्कि आत्माओं का संवाद है। हर युग में प्रेम ने समाज को चुनौती दी है, और हर दौर में प्रेम ने इंसान को इंसानियत का पैग़ाम दिया है। यह कहानी उसी इश्क़ की है, जो सीमाओं से परे जाकर अपने अस्तित्व को साबित करता है।  ---पहला अध्याय: मुलाक़ातअमृतसर की गलियों में बसी पुरानी हवेली के आँगन में जब पहली बार आरव ने सना को देखा, तो उसे लगा जैसे समय ठहर गया हो।  सना, एक साधारण लड़की, लेकिन उसकी आँखों में गहराई