सियोल की ऊँची इमारतों के बीच एक नाम था, जिसे हर कोई जानता था—कांग ताए-ह्युन।तीस साल की उम्र में हान्युल ग्रुप का CEO।दौलत, ताक़त, रुतबा—सब कुछ था उसके पास।पर एक चीज़ नहीं थी—अपनी ज़िंदगी पर हक़।“अगर इस साल शादी नहीं की,” उसके दादाजी ने सख़्त आवाज़ में कहा,“तो CEO की कुर्सी भूल जाओ।”ताए-ह्युन के चेहरे पर कोई भाव नहीं आया।उसने बहुत पहले सीख लिया था—भावनाएँ कमज़ोरी होती हैं।उसके लिए शादी भी एक डील थी।और तभी उसकी ज़िंदगी में आई—हान जी-वू।जी-वू किसी अमीर घर से नहीं थी।वह एक फ्रीलांस ट्रांसलेटर थी,जो अपने बीमार छोटे भाई के इलाज के लिए हर दिन