भाग 1 शाम का आसमान हल्के सुनहरे रंग में डूब रहा था। हवेली के पुराने बरामदे में जलती पीली लाइटें उस अतीत को रोशन कर रही थीं, जो कभी खुशियों से भरा था और आज सिर्फ़ साज़िशों की परछाइयों में जकड़ा हुआ था।आरव मल्होत्रा—शहर का सबसे ताक़तवर बिज़नेसमैन, जिसकी एक नज़र लोगों को ऊपर उठा देती थी और एक फ़ैसला उन्हें मिट्टी में मिला देता था—आज पहली बार अपने ही दिल से हार रहा था।उसके सामने खड़ी थीमीरा सिद्दीकी।वही मीरा…जिसे उसने कभी अपनी रूह से भी ज़्यादा चाहा था।और वही मीरा…जिसके नाम से अब उसके सीने में नफ़रत आग बनकर जलती