अधूरी आजादी

शीर्षक: 2025 में भी अधूरी आज़ादीसाल 2025 की सर्द सुबह थी। शहर के बाहर बने फ्लाईओवर के नीचे टीन और प्लास्टिक से बनी झोपड़ियों की एक कतार थी। ऊपर से तेज़ रफ्तार गाड़ियाँ गुजर रही थीं—कुछ में देश के झंडे लगे थे, कुछ पर “डिजिटल इंडिया” और “विकसित भारत” के स्टिकर।उसी फ्लाईओवर के नीचे, एक कोने में बैठी थी शांति देवी—करीब पचपन साल की, झुर्रियों से भरा चेहरा, लेकिन आँखों में अब भी ज़िंदा सवाल।उसके पास बैठी उसकी पोती काव्या, मोबाइल फोन को गौर से देख रही थी। फोन पुराना था, स्क्रीन में दरारें थीं, लेकिन उसमें इंटरनेट चलता था—सरकारी