शीर्षक: वल्चर: परछाइयों से प्यार और प्रलय[दृश्य 1 – हल्की-फुल्की शुरुआत]सुबह का सूरज टूटी इमारतों पर पड़ रहा है। वल्चर छत पर बैठा चाय पी रहा है। पास ही अनाया पट्टी बाँध रही है।अनाया (मुस्कराकर):“हीरो बनने का मतलब ये नहीं कि रोज़ कट-फट कर आओ।”वल्चर (हँसते हुए):“कट-फट नहीं, ये मेरी ‘ऑफिस यूनिफॉर्म’ है।”अनाया उसके पंख ठीक करती है।अनाया:“तुम्हारे पंखों में हर बार कोई नया छेद क्यों होता है?”वल्चर:“क्योंकि विलन डिस्काउंट नहीं देते, फुल चार्ज लेते हैं।”दोनों हँसते हैं। हल्का रोमांस, हल्की नज़दीकी।[दृश्य 2 – छोटा सा डेट मोमेंट]शाम को दोनों शहर की पुरानी छत पर बैठकर स्ट्रीट-फूड खा रहे हैं।अनाया:“अगर