मन के अल्फाज - ख्वाहिश की कविताएं। - 2

1.) डर लग रहा है।“ आज मुझे डर लग रहा है…!कहीं वक्त से पहले ये वक्त ना बदल जाए।जिंदगी के रास्ते में कई मोड़ है। डर है, कहीं जिंदगी किसी गलत मोड़ पर ना मूड जाये।कुछ मर्जीयां खुशियों की भी तो होती होंगी।डर है, कहीं मुझ तक आते आते खुशियों की मर्जी ना बदल जाये।आज मुझे डर लग रहा है…!कहीं बक्त से पहले ये बक्त ना बदल जाये।कर रही हूँ मे जो कोशिशे बो अब तक तो ईमानदार है।डर है, कहीं कल को मेरा ईमान ना बदल जाये। बड़ी दौड़ धूप है,बड़ी है कठिन रहेँ मै जिन पर चल रही हूं,बो कांटे