बारिश की बूँदें खिड़की के शीशे पर टकरा रही थीं। हर टपाक के साथ कमरे में मौजूद सन्नाटा और गहरा होता जा रहा था। राहुल वर्मा अपनी पुरानी कुर्सी पर बैठा था। टेबल पर आधी पी गई चाय का कप ठंडा हो चुका था। सामने दीवार पर लगी पुरानी घड़ी की सुइयाँ धीरे-धीरे सरक रही थीं—रात के दो बजकर सत्रह मिनट। उसने फाइल खोली। पहली तस्वीर: डॉ. अजय मेहरा। उम्र ५२। कार्डियोलॉजिस्ट। १९ अक्टूबर की रात को अपने क्लिनिक में गोली मारी गई। दूसरी तस्वीर: क्लिनिक का दरवाज़ा। बाहर से ताला लगा हुआ। अंदर से कुंडी। तीसरी: फर्श पर फैला खून। और खून के बीच