अपनापन लेखक: विजय शर्मा एरी ---प्रस्तावनासमर्पण—यह शब्द केवल त्याग का नहीं, बल्कि प्रेम, कर्तव्य और आत्मा की गहराई का प्रतीक है। जब कोई व्यक्ति अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के लिए जीता है, तो वही समर्पण भाव कहलाता है। यह कहानी एक ऐसे युवक की है, जिसने अपने जीवन को दूसरों की भलाई में समर्पित कर दिया। ---पहला अध्याय: गाँव का युवकपंजाब के एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का युवक रहता था। साधारण परिवार से था, लेकिन उसके सपने बड़े थे। वह पढ़ाई में तेज़ था और शहर जाकर नौकरी करना चाहता था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। पिता खेती