शहर की हलचल से दूर, अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में बसा 'सुर-सदन' अपनी भव्यता और रहस्यमयी शांति के लिए जाना जाता था। यह बंगला सफेद संगमरमर से बना था, जो चांदनी रात में किसी भूतिया महल जैसा प्रतीत होता था। लेकिन आज की रात अलग थी। आज यहाँ संगीत नहीं, बल्कि मृत्यु का सन्नाटा पसरा था। रात के ठीक तीन बजकर पंद्रह मिनट पर, जब पूरा शहर गहरी नींद में था, सुर-सदन के 'रियाज़ कक्ष' से एक ऐसी आवाज़ निकली जिसने आसपास के पेड़ों पर सो रहे पक्षियों को भी डराकर उड़ा दिया। वह कोई चीख नहीं थी, बल्कि