खामोश गाँव का आखिरी मुसाफिरसमीर एक फ्रीलांस फोटोग्राफर था, जिसे दुनिया के नक्शे से मिट चुके या भुला दिए गए स्थानों की तस्वीरें खींचने का शौक था। इसी शौक के चलते वह हिमालय की तलहटी में बसे एक गुमनाम गाँव 'रुद्रपुर' पहुँचा। इस गाँव के बारे में कहा जाता था कि यहाँ सूरज ढलने के बाद परिंदे भी अपनी आवाज बंद कर लेते हैं।गाँव के लोग बाहरी दुनिया से कटे हुए थे और उनकी आँखों में एक अजीब सा खौफ हमेशा तैरता रहता था। समीर ने गाँव के बाहरी हिस्से में स्थित एक पुरानी सराय में रुकने का फैसला किया।