बरसात हो रही थी। अस्पताल के बाहर मैं भीगता हुआ खड़ा था। न छाता था, न किसी का साथ। हाथ में एक पुराना-सा मोबाइल था, जिसकी स्क्रीन पर आज भी एक मैसेज टिमटिमा रहा था— “बस थोड़ा इंतज़ार करना… मैं लौट आऊँगी।” उसका नाम पायल था। और वो मेरी ज़िंदगी का वो सच थी, जिसे मैं आज भी झूठ नहीं कह पाता। हम बहुत अमीर नहीं थे। दो वक़्त की रोटी, किराए का कमरा और ढेर सारे सपने— बस इतना-सा ही हमारा संसार था। लेकिन हमारा प्यार… वो हालातों से कहीं बड़ा था। पायल अक्सर कहा करती थी— “अगर हालात