शीर्षक: वल्चर बनाम ग्रेट गोरिलाविशेष अध्याय: “गलतफ़हमी का महायुद्ध”[दृश्य 1 – वन की सीमा, संध्या]घना जंगल। ऊँचे वृक्षों के बीच धूप की अंतिम किरणें छनकर गिर रही हैं। दूर पहाड़ों की ओट से धुएँ की पतली रेखा उठती है। अर्जुन (वल्चर) आकाश में मंडराता हुआ नीचे उतरता है। उसके पंखों की फड़फड़ाहट से पत्ते थरथरा उठते हैं।अर्जुन (स्वगत):“शहर के बाहर अजीब ऊर्जा महसूस हो रही है… जैसे किसी दानव की साँसें धरती को दबा रही हों।”जंगल के भीतर भारी कदमों की ध्वनि गूँजती है।[दृश्य 2 – ग्रेट गोरिला का प्रकट होना]झाड़ियों को चीरता हुआ एक विशालकाय प्राणी बाहर आता है—ग्रेट