शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानभाग 5: “पंखों का रहस्य”[दृश्य 1 – परित्यक्त मंदिर, अर्धरात्रि]टूटा हुआ प्राचीन मंदिर। छत से चाँदनी छनकर गिर रही है। घायल वल्चर स्तंभ के सहारे खड़ा है। उसके पंखों से रक्त टपक रहा है। शहर में उसे खलनायक घोषित किया जा चुका है।वल्चर (स्वगत):“रक्षक से राक्षस बनने में एक झूठ ही काफ़ी होता है…पर सच अब भी साँस ले रहा है।”अचानक हवा में सुनहरी रोशनी फूटती है।[दृश्य 2 – नए नायक का आगमन]रोशनी से एक तेजस्वी योद्धा प्रकट होता है—आर्यव्रत। उसके कंधों पर उजले पंख, आँखों में शांत ज्वाला। उसके चारों ओर आभा है।आर्यव्रत:“तूने मेरी