शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानभाग 3: “राख से उठता शहर”[दृश्य 1 – युद्ध के बाद की सुबह]जली हुई इमारतें, टूटी सड़कें, धुएँ के बादल। दमकल की गाड़ियाँ अभी भी पानी छिड़क रही हैं। लोग मलबे में अपने अपनों को ढूँढ रहे हैं। अर्जुन एक ऊँची छत पर खड़ा शहर को देख रहा है। उसके पंख थके हुए सिमटे हैं।अर्जुन (स्वगत):“नरकवीर गिर गया… पर यह शहर अब भी ज़ख़्मी है।शत्रु को हराना आसान है… विनाश को भरना कठिन।”नीचे एक बच्चा जली हुई दुकान के सामने रो रहा है। अर्जुन की आँखें नम हो जाती हैं।[दृश्य 2 – शून्य का जन्म]अंधेरी