शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानभाग 2 (बैकस्टोरी): “रक्तपंख का जन्म”[दृश्य 1 – महानगर का पिछड़ा इलाका, प्रातः]टूटी-फूटी झुग्गियाँ। नालियों की दुर्गंध। धूप में बच्चे पानी की टूटी बाल्टी के चारों ओर खेल रहे हैं। अर्जुन किशोर अवस्था में है, कबाड़ बीनते हुए घर लौटता है। उसकी माँ बीमार चारपाई पर लेटी है।माँ (कमज़ोर स्वर में):“बेटा… आज दवा ले आया?”अर्जुन (मुस्कराकर):“आज ज़रूर ले आऊँगा, माँ। कल से हालात बदलेंगे।”वह बाहर निकलता है। आँखों में उम्मीद है।[दृश्य 2 – कारख़ाना मालिक का धोखा]पुराने कारख़ाने में मज़दूरों की भीड़। मालिक मजदूरी देने से मना कर देता है।अर्जुन के हाथ में पसीने से