मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 11

हवेली का शाप: रूहों का कैनवासहिमालय की तलहटी में बसा 'नीलगिरी' गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए कम और अपनी सरहदों पर स्थित 'राय बहादुर की हवेली' के लिए ज्यादा जाना जाता था। 19वीं सदी की यह हवेली अब खंडहर बन चुकी थी, लेकिन इसकी भव्यता आज भी राहगीरों को डराने के लिए काफी थी। गांव के बुजुर्ग कहते थे कि उस हवेली के अंदर समय रुक गया है। जो वहां सूर्यास्त के बाद कदम रखता है, वह फिर कभी सूर्योदय नहीं देख पाता।आर्यन, दिल्ली का एक निडर खोजी पत्रकार और 'पैरानॉर्मल एक्टिविस्ट', इन कहानियों को सिर्फ अंधविश्वास मानता था।