तेरी मेरी कहानी - 7

अगले दिन सुबह से दोनों फिर काम में डूब गए। समय जैसे दौड़ रहा था।आख़िरी दिन शाम तक प्रोजेक्ट पूरा हुआ।सिया ने फाइल अर्शित को भेजते हुए काँपती आवाज़ में कहा—“सर… हो गया।”अर्शित ने ध्यान से पूरा प्रोजेक्ट देखा। कुछ देर चुप रहा। फिर उसने लैपटॉप बंद किया और मुस्कुरा कर कहा— “बहुत अच्छा काम किया है, सिया।”उसकी आवाज़ में गर्व था।सिया की आँखें नम हो गईं।यह वही लड़की थी, जो कभी खुद पर भरोसा नहीं कर पाती थी…और आज उसी के काम पर किसी को गर्व हो रहा था। अर्शित ने सिया से कहा—" मिस शर्मा आप बहुत थक