जीतेशकान्त पाण्डेय- अवकाश प्राप्ति के बाद आपकी दिनचर्या क्या रही ? डॉ0 सूर्यपाल सिंह- अवकाश प्राप्ति के बाद एक जुलाई 2000 को मैं अपने घर आ गया। घर गाँव में था। अब तक शहर में कोई आवास नहीं बनाया था। गाँव में रहते हुए सबसे पहले ‘कंचनमृग’ का जो कार्य बाकी था, उसको पूरा किया। यह मेरा पहला उपन्यास था जो 2000 में ही प्रकाशित हो गया। मेरी रुचि अध्ययन-अध्यापन और लेखन में थी। अब मेरे पास जो भी समय था उसमें लेखन का कार्य चलता रहा। पेंशन का बीस प्रतिशत मैंने बेच दिया था। उससे दो लाख रुपये से